गुरु.

“गुरु” कोई “व्यक्ति” नहीं, कोई “शरीर” नहीं, “गुरु” एक “तत्व” है, एक “शक्ति है” “गुरु” यदि “शरीर” होता, तो इस छोटी सी “दुनिया” में, एक ही “गुरु” “पर्याप्त” होता “गुरु” एक “भाव” है, “गुरु” “श्रद्धा” है “गुरु” “समर्पण” है आपके “गुरु: आपके “व्यक्तित्व” का “परिचय” है “कब” “कौन”, “कैसे” आपके लिये “गुरु” “साबित” हो, यहContinue reading “गुरु.”

चलो एक नई शुरुवात करते हैं.

चलो एक नयी शुरूआत करते हैं पिछली सब गलतियां माफ करते हैं अच्छा बुरा सब के साथ है हम अपने दिल को साफ़ करते हैं तेरा मेरा कौन है इस दुनिया में शक छोड़ अपने यकीं पर विश्वास करते हैं कोई पास हो या दूर हो दुआ में सभी को याद करते है अपने औरContinue reading “चलो एक नई शुरुवात करते हैं.”

Mystery of time.

Desire never diminishes throughout life, Problems are also never solved. Yet we have been living in this desire for years, That the difficulties of tomorrow which are today Probably won’t happen tomorrow! Even the bird does not get food sitting in the slurry,… And no effort is successful without effort…. However, neither the time hasContinue reading “Mystery of time.”

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