वायदा करो।

आज वादा करो इक इरादा करोसंग जीने का मरने का वादा करो। हाथ मे हाथ तेरा रहे इस कदरचांद की चांदनी सा हो रिश्ता मगर,दिल मे दीपक वफ़ा का जलाएंगे हमजिन्दगी में चलेगे मिलाकर कदम ।गर ख़ता कोई हो माफ करने का ,तुम हमसे वायदा करो। इक इरादा करो। जिस्म से जिस्म का इश्क होताContinue reading “वायदा करो।”

दिल की बात.

हमारी याद से बढ़कर कोई अपना नहीं लगता। सहारा जिसको माना था डुबाया है उसी ने यूं। मेरे राही मेरे हमदम जरा सा याद करलो तुम। तेरे बिन दिल नहीं लगता बताऊँ क्या , तुम्हें कैसे। नहीं आऊँगा मिलने को ये तुम याद रख लेना। मगर तुम्हारी यादों को मै हमेशा याद रखूंगा । भुलानाContinue reading “दिल की बात.”

Dil ki bat(27).

ये दुनिया सुख दुख का सागर है,यहाँ कब क्या हो किसको पता है,सम्हलकर चलना जीवन की राहों में,मुसीबत का एक कांटा भी दिल चिर देता है।भरोषा जल्दी करने वालो को,ज्यादातर धोखे सहना पड़ता है।जिंदगी का हर पल ,यहाँ कुछ न कुछ सिखाकर ही जाता हैखुशिया न सही तो ,तजुर्बे तो देकर ही जाता है।बद सेContinue reading “Dil ki bat(27).”

दिल की बात(19)

आज अतीत की छवि, मन मे उभरने लगी फिर से भूली बिसरी यादों का सिलसिला वाकायदा अपनेपन का अहसाह क्यु है । हमे आज भी तेरा इंतजार क्यु है । जाने वाले क्या आते हैं लौटकर ,शायद आते होंगे यहां तो सारी उम्मीदों को जलाये बैठे हैं । ………….#Sngms

दिल की बात (17)

ख़ता बस इतनी , देखे थे ख्वाब हमने , संग तेरे जीने मरने के , इश्क से मेरा कोई वास्ता न था । कम्बख़्त दिल मजबूर था , शायद और कोई रास्ता न था । जिंदगी एक पहेली आज भी, जिसे समझना मुश्किल है। राह में चलने से पहले, अंजाम समझना मुश्किल है। भावों कीContinue reading “दिल की बात (17)”

काव्यार्पण(12) पिता.

सोंच रहा हूं लिखू पिता पर, पर सामर्थ्य न मेरी है। आज मैं हूं जो कुछ भी, सारी रहमत तेरी है । बचपन मे कंधे पे बिठाकर, दुनिया मुझे दिखाया था। सदा चलो तुम नेक राह पर, हर दम यही सिखाया था। यदि अड़ जाता कभी ज़िद्द पर, सबकुछ लेकर देते। क्या-क्या दुःख उठाना पड़ताContinue reading “काव्यार्पण(12) पिता.”

दिल की बात(15)

क्या खता हुई थी हमसे, जो गम की मिली घड़ी । यही की दिल लगया था, जोड़ा था दिल से दिल की लड़ी । बेखौफ परिंदे के माफिक, उड़ रहे थे स्वेच्छ गगन पर । काट दिया तूने पर सारे, खाकर ठोकर गिरे जमीं पर । कभी सोंचा न था दूर होंगे आपसे, वो मेरीContinue reading “दिल की बात(15)”

दिल की बात(13)

हम लाख भुलाना चाहें, अपने अतीत की यादों को, कहते हैं सभी आज को देखो, सोंचो न तुम कल को, बिना अतीत वजूद न अपना, तमाम उम्र तलक देखे सपना, जब वक़्त अंत का आता है, सब पड़ा यही रह जाता है। विडम्बना कैसी है, हजारो हैं साथी सुख में, पर गम में कोई हमContinue reading “दिल की बात(13)”

दिल की बात(12)

दुनियां में कोई खुशी नहीं, किंचित गम में सब होते हैं।महफ़िल में चाहे जो हंस दे,तन्हाई में जा रोते हैं।अपनो की खुशयो की खातिर,परवाह नहीं खुद की करता,निःस्वार्थ भाव का प्रेम यही,जो खुद मिसाल बन जाता है।अपने खातिर सब जीते हैं, दुनियां का दस्तूर यही।जो परहित किंचित जीता है, मानवता की पहचान यही।दिनों, दुखियो, असहायोंContinue reading “दिल की बात(12)”

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