जीवन में जब भी….

जीवन में जब भी हम खराब दौर से गुजरते हैं..तब मन में यह विचार जरूर आता है… कि, परमात्मा मेरी परेशानी देखता क्यों नहीं है l……मेरे दुःख कम क्यों नहीं करता l पर याद रखना…जब परीक्षा चल रही होती है…तब शिक्षक मौन रहते है………… …….#Sngms

Dil ki dhadkan.

मेरे सीने के दिल की हर धड़कन तेरा ही नाम जपती है। विरह रूपी धूप में तो मेरी ये जिस्मों जान भी जलती है। सहारा जिसको माना था जो कश्ती पार लगाएगा। कभी सोंचा नहीं था कि भरे मंझधार में डुबाएगा।।1 बिना तेरे कोई भी शाम न कोई सहर होती थी। भरी महफ़िल में तनहाContinue reading “Dil ki dhadkan.”

कान्हा के संग(2)

(1) उद्धौ जाओ,तुम मिल आओ, खोज खबर गोपियों की लाना है। उन्हें समझाओ,मत घबराओ,दर्शन मेरा उनको समझना है। हर घट रहता,करता धरता, जग का मालिक बतलाना है। छोड़ विरह को,ज्ञान योग को,जाकर तुम्हे सिखाना है। (2) पहुँच पास संदेश सुनायो,सब सखि दौड़ दौड़ तब आयो,क्या ,कैसे मोहन सबन अब पूछन लागी है। काम धाम सबContinue reading “कान्हा के संग(2)”

आज से तू मेरी.

आज से तुम मेरी मैं तेरा होगया। देखा जब से तुझे बावरा हो गया। मैने सोंचा न था,मैंने जाना न था। आपके हुश्न का जब दीदार होगया। कण कण में समाई है सूरत तेरी। मौत के बाद भी रहे ये दोस्ती। मौज का नाम क्या आज जाना सनम तेरी राहों में दिल को बिछाना सनमContinue reading “आज से तू मेरी.”

कान्हा के संग(1).

प्रेम की बात,लिए सौगात,प्रभात किए बहु जीवन पाके। प्रेम रसिक, रस पीवन काहि, मन मे मनमोहन भाव जगाके। प्रेम को पाठ पढ़ाए सभी को,चितचोर रहे मोरे कृष्ण कन्हाई। जमुना जल अरु व्रजभूमि मा प्रेम जहां कण कण में समाई। गोकुल धाम, रह्यो अभिराम मोरे घनस्याम जहां रास रचायो। जहाँ ग्वालन ग्वालिन संग प्रभू धेनु चरायContinue reading “कान्हा के संग(1).”

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