Dil ki dhadkan.

मेरे सीने के दिल की हर धड़कन तेरा ही नाम जपती है। विरह रूपी धूप में तो मेरी ये जिस्मों जान भी जलती है। सहारा जिसको माना था जो कश्ती पार लगाएगा। कभी सोंचा नहीं था कि भरे मंझधार में डुबाएगा।।1 बिना तेरे कोई भी शाम न कोई सहर होती थी। भरी महफ़िल में तनहाContinue reading “Dil ki dhadkan.”

दिल की बात(11)

प्रेम की राह में ,बस यही बात है, मैं तेरी मानलू तू मेरी मानले। थोड़ा सा तुम चलो,थोड़ा सा हम चले। साथ मिलकर सनम,जिंदगी काट लें । मैं तेरी…… आओ ख्वाबो की दुनिया बसाये सनम । जिस्म दो हो मगर ,एक ही जान हो। ऐसा रिश्ता चलो जोडलें। मैं तेरी…. चांद हू मैं तेरा,तुम मेरीContinue reading “दिल की बात(11)”

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