बाबू जी(2).

मेरे प्रिय मित्रों आपने इस कहानी के पहले भाग को बहुत प्यार दिया है। अतः आप सभी का दिल से बहुत बहुत आभार। अगर अपने इस कहानी का पहला भाग नहीं पढ़ा है तो पहले आप उसे पढ़ो अन्यथा आपको कहानी समझमें नहीं आएगी। बल्लू को बाहर बैठाकर अरुण और राजेश दोनों होटल के मालिकContinue reading “बाबू जी(2).”

बाबू जी(1).

अरुण और राजेश दोनों बहुत अच्छे मित्र थे। एक बार दोनों नैनीताल गए घूमने के लिए। वहाँ जाकर एक होटल में ठहरे थे। शाम के वक़्त दोनों बाहर जाकर पेड़ों के नीचे पत्थर की पट्टी में बैठकर मौषम का आनंद ले रहे थे।शाम का वक़्त और कड़ाके की ठंढ थी। कोहरा इतना था कि आपकेContinue reading “बाबू जी(1).”

किसान.

खेतों में दिन रात काम कर,सबका पेट वो भरता है,बहुत बड़ा दुर्भाग्य यहां पर,आत्म हत्या तक करता है।किंचित सुख सुविधा न मिलती,हम सबके पालनहार को,देश की उन्नति कैसे होगी,जब उनकी सब आशाएं मरतीं ।सूखा हो जब फसल सूखती,हो लाचार हाथ वो मलता,बर्बादी में अश्रु बहाकर,ईश्वर को आह सुनाता ।कड़ी धूप में जब सब जन,छतरी लेContinue reading “किसान.”

काव्यार्पण (1) दीन

जब दुख सागर हैं आते, दिनों को ही दहलाते, झर-झर फिर आंसू बहते, दुनिया के गम को सहते, आंसू के घूंट को पीते, ईश्वर से सब कुछ कहते । 1 पर रहम नहीं है मिलता, बस गम ही गम है मिलता, वो आस लगाए रहते, बस गम के बादल रहते, खुशी के दिन भी आएंगे,Continue reading “काव्यार्पण (1) दीन”

दुखियारे :-

दीन सबन को लखत है, दीनहिं लखे न कोय। जो रहीम दीनहिं लखे,दीन बन्धु सम होय।। आइये गरीब,बेबस लाचार और दुखों से भरी जिंदगी जीने वाले दुखियारों पर लिखी कुछ पंकितयों को देखते हैं…. है दुःखद बात दुखियारों की, दुःख में ही सुख को देख रहे । पल-पल करते वो अश्रु पात, हर क्षण वोContinue reading “दुखियारे :-“

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