जीवन के मोड़

पता नही किस मोड़ पे लाये,

जीवन को कोई समझ न पाये,

रैन दिनों का चलना चलके,

पता नहीं तू कहाँ को जाये ।

कुछ तो खोज बीन अब करले,

आज नहीं कल पछतायेगा,

दुनिया का सब ज्ञान तुझे है,

खुद का पता लगाना होगा !

…..@Sngms

विचार शक्ति-

विचारों में महान शक्ति होती है। हम जैसे विचारों को अपने दिमाग मे आने देते हैं वैसे ही हमारे देखने के,सोचने के,लोगो के साथ व्यवहार करने के तरीके में परिवर्तन आना शुरू हो जाता है। विचारों में अद्भुत शक्ति समाहित है बस उसको उचित दिशा देने की आवश्यकता है। जैसा हम सोचते हैं वैसा हम […]

विचार शक्ति-

क्या चाहिए??

क्या चाहिए तुमको ? क्यो उदास हो ? कैसी कसक ? कैसी वेदना ? ये जीवन वरदान है या फिर अभिशाप बन गया है । बेशक जीवन वरदान ही है लेकिन मुझे खुद का नहीं पता कि मैं कौन हूं ? क्या हमारी उदासी का कारण हमारी वासनाओ का पूर्ण न होना है या फिर […]

क्या चाहिए??

आध्यात्मिकता-अन्योक्ति

मेरे प्रिय पाठकों, ये रचना अन्योक्ति है आध्यात्मिकता पर आधारित है। जिसमे दर्शन है मौत का ,जीवन का,परमेश्वर का, सद्गुरु का । समझना थोड़ा मुश्किल होगा । परन्तु विश्वास है कि आप समझ सकते हैं। जिसके लिए आपको पूरी रचना पढ़ना पड़ेगा तो आइए शुरू करता हूं…… एक बोला, हल्के से मुंह खोला साथ में […]

आध्यात्मिकता-अन्योक्ति

Natural beauty.

This photo pic by me…sngms

जीवन आधार प्रकृति है,

मानव का व्यवहार प्रकृति है,

बिना प्रकृति के कुछ भी न मानव,

मानव का संसार प्रकृति है ..

…..Sngms

यथार्थ के दोहे

कुछ यथार्थ … चादर ओढ़े सत्य की, गाते झूठे गीत।चिकनी चुपड़ी बात से,बनते झूठे मीत।। ऐसे झूठे मीत से,रहो नित सावधान।जाने कब करने लगे,तुम पर ही संधान।। मीत समझना उसे जो,सदा निभाये साथअवसरवादी हो नहीं, कभी न छोड़े हाँथ।। जलन अगर कोई करे , मत देना तुम ध्यान।बढ़ते रहो नित लक्ष्य पर,अशोक जानो ज्ञान।। हांथों […]

यथार्थ के दोहे

माँ

माँ की ममता मां तेरा दर्जा इस जग में,उस भगवान से ऊंचा है।छांव में आँचल के मां तेरे,बचपन मेरा बीता है।माँ तेरी ममता से बढ़कर,जग में ना कोई दूजा है।।माँ तेरा दर्जा… मेरी छोटी खुशी के खातिर,अपना सब कुछ खोया है।सबसे पहले जग में अम्मा,कह कर हर एक बच्चा रोया है।सबसे पहले इस जग में […]

माँ

कविता

कविता और नहीं कुछ होती,बस मन के भावों गान है।यह कबीर की साखी जैसी,और घनानंद की सुजान है।पन्त की पल्लव सी मधुर और,दिनकर की हुंकार सी ।कविता पढ़ता लिखता है जो,बन जाता वो महान है।। अशोक ‘प्रियदर्शी’

कविता

लेखनी बनी है प्रेयसी

लेखनी बनी है प्रेयसी लेखनी बनी है प्रेयसी छोड़ इसे ना पाऊंगा।संग में इसके मैं सदा ही गीत प्रेम के गाऊंगा।। मन के भावों को सजाती उर के तारों को बजाती।कुछ नया लिखने की खातिर प्रेरणा के गीत गाती।चाहकर भी हाँथ अपने रोक नहीं अब पाऊंगा।लेखनी बनी है प्रेयसी… प्रतिभा मुझमे भी छिपी है अब […]

लेखनी बनी है प्रेयसी
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