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Truth of life(2).What is our reality?

What is our reality This is a very complex question. Everyone answers this according to themselves. So now you see my thoughts. I will talk about it in two ways. I will give a scientific approach first and then spiritual. According to me, would it be wrong to say that I am energy. Because theContinue reading “Truth of life(2).What is our reality?”

माँ

माँ की ममता मां तेरा दर्जा इस जग में,उस भगवान से ऊंचा है।छांव में आँचल के मां तेरे,बचपन मेरा बीता है।माँ तेरी ममता से बढ़कर,जग में ना कोई दूजा है।।माँ तेरा दर्जा… मेरी छोटी खुशी के खातिर,अपना सब कुछ खोया है।सबसे पहले जग में अम्मा,कह कर हर एक बच्चा रोया है।सबसे पहले इस जग मेंContinue reading “माँ”

कविता

कविता और नहीं कुछ होती,बस मन के भावों गान है।यह कबीर की साखी जैसी,और घनानंद की सुजान है।पन्त की पल्लव सी मधुर और,दिनकर की हुंकार सी ।कविता पढ़ता लिखता है जो,बन जाता वो महान है।। अशोक ‘प्रियदर्शी’ कविता

लेखनी बनी है प्रेयसी

लेखनी बनी है प्रेयसी लेखनी बनी है प्रेयसी छोड़ इसे ना पाऊंगा।संग में इसके मैं सदा ही गीत प्रेम के गाऊंगा।। मन के भावों को सजाती उर के तारों को बजाती।कुछ नया लिखने की खातिर प्रेरणा के गीत गाती।चाहकर भी हाँथ अपने रोक नहीं अब पाऊंगा।लेखनी बनी है प्रेयसी… प्रतिभा मुझमे भी छिपी है अबContinue reading “लेखनी बनी है प्रेयसी”

दो लब्ज़

मुस्कुरा कर के जी लें जीवन का हर पल यहाँ,कौन किसने कब है देखा होगा कैसा कल यहाँ।नफरतों की आँधियों को आओ मिलकर रोक लें,गर समस्या सामने है तो उसका मिलेगा हल यहाँ।। प्रेम की पावन डगर पर पग दो पग आओ चलें,आसमाँ छूने की हजारों हसरतें मन में पलें।करुणा दया के भाव अब पुस्तकोंContinue reading “दो लब्ज़”