Dil ki dhadkan.

मेरे सीने के दिल की हर धड़कन तेरा ही नाम जपती है।

विरह रूपी धूप में तो मेरी ये जिस्मों जान भी जलती है।

सहारा जिसको माना था जो कश्ती पार लगाएगा।

कभी सोंचा नहीं था कि भरे मंझधार में डुबाएगा।।1

बिना तेरे कोई भी शाम न कोई सहर होती थी।

भरी महफ़िल में तनहा हो तेरी यादें रुलाती थी।

जिस्म तक होती नहीं सीमित जहाँ सच्ची मोहब्बत हो।

खुदा का नाम मोहब्बत है जहाँ सच्ची इबादत हो।2

यहाँ मीरा दीवानी है , वहां राधा दीवानी थी।

मिलन है नाम राधा का विरह मीरा कहानी थी।

मोहब्बत में क्या खोया या पाया बात नहीं होती।

क्या कम है कि मर जाने पे ये दुनिया याद करती ।।3

अधूरा नाम प्यार का है इश्क और मोहब्बत भी अधूरे हैं।

किया था इश्क मजनू ने विरह की आग में जलकर गुजारे हैं।

मिली ना हीर रांझा को प्रेम का जोगी बनकर के उम्र बीती।

मोहब्बत में तरसने और तड़पने की चली सदियों आई ये रीती।4

………..#Sngms

Published by Sngms

Atarra Banda Uttar pradesh India

2 thoughts on “Dil ki dhadkan.

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