कान्हा के संग(2)

(1) उद्धौ जाओ,तुम मिल आओ, खोज खबर गोपियों की लाना है। उन्हें समझाओ,मत घबराओ,दर्शन मेरा उनको समझना है। हर घट रहता,करता धरता, जग का मालिक बतलाना है। छोड़ विरह को,ज्ञान योग को,जाकर तुम्हे सिखाना है। (2) पहुँच पास संदेश सुनायो,सब सखि दौड़ दौड़ तब आयो,क्या ,कैसे मोहन सबन अब पूछन लागी है। काम धाम सबपढ़ना जारी रखें “कान्हा के संग(2)”

पहचान.

*किसी भी पेड़ या पौधे पर फल-फूल* *से ज़्यादा पत्ते होते हैं,* *फिर भी वो पेड़ पौधा फल या* *फूल के नाम से पहचाना जाता है.* *ठीक उसी तरह हमारे पास अच्छी बातें* *कितनी ही क्यों ना हो,* *पहचान तो हमारे कर्मो से ही होती है ।* ……#Sngms

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