वृद्धोपसेविनः

शादी की सुहाग सेज पर बैठी एक स्त्री का पति जब भोजन का थाल लेकर अंदर आया तो पूरा कमरा उस स्वादिष्ट भोजन की खुशबू से भर गया रोमांचित उस स्त्री ने अपने पति से निवेदन किया कि मांजी को भी यहीं बुला लेते तो हम तीनों साथ बैठकर भोजन करते। पति ने कहा छोड़ोContinue reading “वृद्धोपसेविनः”

एक सवाल.

जीवन की दुर्गम राहों में अवलम्बन सत्य का लेकर चले। ऋषियों मुनियों ने आदर्श बनाया, वो परिपाटी दिल मे सदा पले।। हैरान हूं,जो सत्य मार्ग पर सदा चले, क्यो कांटो की सेज उन्हें मिलती। जो भ्र्ष्टाचार में लिप्त रहे, उनको जीवन की मौज मिले। आधार बनाकर धर्ममार्ग का, जीवन जीने पर इतराता हूं, आज नहींContinue reading “एक सवाल.”

गुरु.

“गुरु” कोई “व्यक्ति” नहीं, कोई “शरीर” नहीं, “गुरु” एक “तत्व” है, एक “शक्ति है” “गुरु” यदि “शरीर” होता, तो इस छोटी सी “दुनिया” में, एक ही “गुरु” “पर्याप्त” होता “गुरु” एक “भाव” है, “गुरु” “श्रद्धा” है “गुरु” “समर्पण” है आपके “गुरु: आपके “व्यक्तित्व” का “परिचय” है “कब” “कौन”, “कैसे” आपके लिये “गुरु” “साबित” हो, यहContinue reading “गुरु.”

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