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आध्यात्मिकता-अन्योक्ति

मेरे प्रिय पाठकों,

ये रचना अन्योक्ति है आध्यात्मिकता पर आधारित है। जिसमे दर्शन है मौत का ,जीवन का,परमेश्वर का, सद्गुरु का । समझना थोड़ा मुश्किल होगा । परन्तु विश्वास है कि आप समझ सकते हैं। जिसके लिए आपको पूरी रचना पढ़ना पड़ेगा तो आइए शुरू करता हूं……

एक बोला,

हल्के से मुंह खोला

साथ में लाया था,

एक झोला

जिंदगी भर

उसी को खोला

किसी से कुछ नही बोला

सबने कहा,

बहुत था भोला

किसी ने चलाया उसपे गोला

कुछ कह नहीं पाया,

बस निकल गया चोला ।

अचानक ,

एक आवाज आई

हांथो में लिए रसमलाई

खूबसूरत महबूब आई

देख सबको मुस्कुराई ।

उसने फिर बताया

सारी कहानी समझाया

कमाने को था ये आया

मेरी बड़ी बहन की आज्ञा पाया

साथ में एक झोला लाया ।

झोला भर,

माल कमा के जाना था

समझ न पाया,

ये मेरा दीवाना था

मुझपे ये जान-ए-सार करता था

नासमझ,

मुझे ये प्यार करता था ।

हमने भी,

अपना मुंह खोला दिया

तुमने क्यों,

उसकी जान ले लिया

उसने तुमसे प्यार किया

जीवन भर इकरार किया

प्यार में बेवफाई किया

ये कैसी रसमलाई दिया ।

वह बोली,

तू हमारा किस्सा

नहीं जान पायेगा

जो मर गया

बहुत पछतायेगा

क्या?

रसमलाई खाने न पायेगा

नहीं,

ये अपनी,

सनम के पास जाने न पायेगा।

कैसी सनम?

किसकी तुम बात करती हो?

कितनी खूबसूरत,

ज्यो अहसास करती हो

पता न बताया,

तुम कहाँ रहती हो?

उसका भी बताओ,

जिसका बखान करती हो।

वह बोली

उसकी खूबसूरती

को क्या बताना

जो भी देख ले,

बने उसका दीवाना

जिसका हुश्न,

यहाँ जर्रे-जर्रे में छाया है

जो भी तुम देखते हो,

ये सब उसी की माया है

शून्य की वासी,

हर जर्रे में रहती है

सभी के प्यार को समझती है।

उसी ने

ये सब कहानी बनाया था

हम दो बहनों को

उसी ने बनाया था

मेरे सहारे से लोग,

कमा के जाते हैं

जरूरत होती है जो,

सब यही से पाते हैं

जिंदगी हूँ मैं

ये सभी जानते हैं

बेवफा हूँ मैं,

यह सभी मानते हैं ।

बड़ी बहन,

के बारे में बताऊ

विस्तार से,

मैं तुम्हे समझाऊं

उसके मिलन को,

लोग कह नही पाते हैं

मेरी वजह से,

वो सह नहीं पाते हैं

मेरे वफ़ा में,

सब लिप्त हो जाते हैं

बड़ी बहन के वफ़ा को,

सब भूल जाते हैं

वही तो सच्चा ,

साथ निभाया करती है

प्यार की कुर्बानी देकर,

सनम से,

मिलाया करती है ।

हम दो बहनों के,

एक बड़ा भाई है

सनम से मिलने के

रास्ता सभी बताता है

जो जाना चाहे तो,

अनुमति वही दिलाता है

सारे फार्म भरके,

मुहर वही लगता है

बिना लगाये मुहर,

कोई सनम को न पता है

सनम से भी,

बड़े हैं वो,

निकाह उनका करवाते हैं

जो भी जाए सनम संग

फिर कभी वापस न आए,

ऐसी क्रिया करवाते हैं ।

………………#Sngms

आपका बहुत-बहुत धन्यवाद जो अपने पूरा पढ़ा…..#Sngms

Published by Sngms

Atarra Banda Uttar pradesh India

5 thoughts on “आध्यात्मिकता-अन्योक्ति

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